Himachali Lakucha

Lakucha is one of the most revered native fruits that finds mention in several Hindu texts and treatises. Lakucha (Artocarpus lacucha), commonly known as monkey jack or monkey jackfruit is often taken to be the cousin of the more famous jackfruit and possesses a rare combination of sweetness and sourness accompanied with a fiery punch.   In... Continue Reading →

Himachali Lasura

Lasura, a relatively unknown tree to many is actually one of the most revered trees in India. Also known as Indian Cherry or Gum Berry or Glue Berry, lasura as it is called in the hilly state of Himachal has been used in Ayurveda, traditional medicines and Unani for centuries.   The fruits, leaves, bark... Continue Reading →

Himachali Aaroo Pickle

The hilly state of Himachal Pradesh has a variety of traditional pickles prepared from native fruits, vegetables, tree stems, buds, roots and leaves. These pickles are revered by the locals for their nutritional, medicinal and healing properties. Each part of Himachal has a particular speciality based on the availability of the produce and its use.... Continue Reading →

Himachali Lingri

Lingri or lungru as it is known in Himachal Pradesh is an indigenous vegetable that grows in the wild in the Himalayan region. This fern also known as fiddlehead (Diplazium esculentum (Retz.) Sw) is widely used by locals of Sikkim, Uttarakhand, Himachal and Union Territory of Jammu and Kashmir in their traditional cuisine.   Lingri is... Continue Reading →

Kanpur Gadbad Chaat

A delicious innovation found only in Kanpur is gadbad chaat that literally translates to confusing chaat. As the name suggests, this speciality of Kanpur has a variety of flavours and textures thrown into one snack designed to leave you confounded!   This five-decade old recipe has pretty much everything a chaat bhandar sells - khasta, papdi, sev, bhoondi, puri and sometimes even a luchi.... Continue Reading →

Kanpur Sultani Dal

Sultani Dal, a sinfully delicious Kanpur and Lucknow speciality is a unique preparation of the Awadh region. Though "eminent historians" of the British Raj claimed that this dish was an innovation of the Mughals and later refined by the Nawabs of Awadh, the truth is this dish has been in existence for centuries.   Dal... Continue Reading →

Kanpur Luchi Sabzi

For centuries, Kanpur or Cawnpore as the British called it has been a food connoisseur's haven. Traditional dishes made in the age-old methods, on wood fire and using excellent local ingredients were much sought-after by weary travellers from distant kingdoms and lands across Akhanda Bharat.   Even today, the Kanpur Railway Station has some of... Continue Reading →

Khurja Kanji Wada

The scrumptious kanji wada is a traditional dish made for the auspicious festivities of Holi. According to locals and several food connoisseurs, this spicy dish that is both a drink and a light snack is best enjoyed in Khurja.   This dish is very simple to prepare and has a lightly flavoured kanji and wada made of... Continue Reading →

Prayagraj Dahi Bhalla

A hugely popular street food of Prayagraj and pretty much the whole of North India is the deliciously creamy dahi bhalla. Also known as dahi pakodi or dahi vada or dahi gujiya, this vada made from urad dal makes its appearance in almost all festivals and celebrations.   It is perhaps the excellent quality milk and curd of Prayagraj... Continue Reading →

Banarasi Tamatar ki Chaat

Tamatar ki chaat as the name suggests is essentially a chatpata chaat with tomato at the helm. Though the tamatar ki chaat sold in Prayagraj and Lucknow is amazing, the Banarasi tamatar ki chaat is in a class of its own. The explosion of flavours - spicy, sweet, sour, tangy and crunchy in each bite is pure... Continue Reading →

Khola Chilli (Canacona Chilli)

The most famous chilli of Goa is the bright red Khola chilli that grows exclusively on the hill slopes of Canacona taluka in the district of South Goa. Also known as Canacona chilli, this variety derives its name from the mountain village Khola where it is grown.   According to historians, chillies were introduced in... Continue Reading →

Bhiwapur Chilli

The quaint town of Bhiwapur in Nagpur district is famous for its bright red chillies. This crop has been cultivated for decades in Bhiwapur, Kuhi and Umred. Locals say that Bhiwapur has been the largest chilli market in the district since the 1960s.   Bhiwapur derives its name from the presiding deity Goddess Bhima and... Continue Reading →

उत्तराखण्ड तेजपत्ता (Tejpat of Uttarakhand)

उत्तराखंड राज्य के नैनीताल, चमोली, टेहरी, बागेश्वर, अल्मोरा, पिथौरागढ़ और चंपावत जिलों में करीब १००० से २००० मीटर की ऊंचाई पर नम और छायादार स्थानों पर उगाए जाने वाले सुगंधित तेजपत्ता सन २०१६ में भौगोलिक सांकेतिक टैग (जी आई) प्राप्त करने का अधिकारी हुआ।   राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय बाजारों में उत्तराखंड का सुप्रसिद्ध तेजपत्ता मीठी... Continue Reading →

ओडिशा का रशोगुल्ला (Rasagola of Odisha)

जिसे देखते ही मुंह में पानी आ जाए, वो है, "ओडिशा का रशोगुल्ला" इसकी उत्पत्ति का इतिहास आठ सौ साल पुराना है। भगवान जगन्नाथ को रशोगुल्ला भोग के रूप में अर्पण करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। ऐसी मान्यता है की १२वी शताब्दी से यह अद्भुत मिष्ठान्न, जगन्नाथ मंदिर में नीलाद्री बिजे... Continue Reading →

भागलपुरी जर्दालू आम (Bhagalpuri Zardalu Mango, Bihar)

हालांकि भागलपुर के जर्दालू आम का उल्लेख भारत की उच्च कोटि की आम की श्रेणियों जैसे: दशहरी, लंगड़ा, हापुज में कहीं नहीं पाया जाता, परंतु इस सौंधी खुशबू वाले आम को अब धीरे धीरे वह पहचान मिल रही है, जिसका यह अधिकारी है। असल में, जर्दालू आम का अपना रोचक इतिहास है, कहा जाता है... Continue Reading →

महाराष्ट्र का लासलगाव प्याज़ (Lasalgaon Onion, Maharashtra)

नाशिक जिले के निफाड तालुक में स्थित लासलगाव न केवल भारत अपितु समस्त एशिया में प्याज का सबसे बड़ा बाज़ार है। कई लोगों को इस बात का पता ही नहीं होगा कि महाराष्ट्र देश में प्याज का सबसे बड़ा उत्पादक है। प्रसिध्द लासलगाव प्याज़ जिसे लाल निफाड या नाशिक प्याज के नाम से भी जाना... Continue Reading →

आसाम की तेज़पुर लीची (Tezpur Litchi of Assam)

पूर्वोत्तर राज्य आसाम के बारे में शायद बहुत से लोग इस बात से अनजान हैं कि यह राज्य जैविक विविधता, विभिन्न वनस्पतियों और जीव जंतुओं से समृद्ध राज्य है। आसाम अपनी उष्णकटिबंधीय वर्षा वनों, बांस के बगीचों, राष्ट्रीय उद्यानों साथ ही विभिन्न प्रकार की स्थानीय खेती और फलों के उत्पादन के लिए भी जाना जाता... Continue Reading →

त्रिपुरा की क्वीन पाइनएप्पल (Tripura Queen Pineapple)

ऐसा माना जाता है कि अप्रतिम सुन्दरता से परिपूर्ण पूर्वोत्तर राज्य त्रिपुरा का नाम वहां की देवी त्रिपुरसुंदरी के नाम पर पड़ा है। हालांकि १८०० से १९०० के आरम्भ के दशक में त्रिपुरा राज्य अपनी सुगंधित चाय के लिए सुप्रसिद्ध था, परन्तु आज इसने अपनी सार्वभौमिक पहचान उष्कटिबंधीय फल और सब्जियों की विस्तृत श्रृंखला के... Continue Reading →

मणिपुर का कचि नींबू (Kachai Lemon, Manipur)

आमतौर पर "मणिपुर का गौरव" नाम से प्रसिद्ध, वहां का अनोखा "कचि चंपरा" या कचि नींबू , उत्तरपूर्व के मणिपुर राज्य के ऊखरूल जिले के सुदूर गांव कचि में पाया जाता है। यह गांव नींबुओं का सबसे बड़ा उत्पादक है, परन्तु इस नींबू में ऐसी क्या खासियत है?   इसका कारण है वहां की उपोषणकटीबंधिय... Continue Reading →

कंधमाल हल्दी (Kandhamal Haladi, Odisha)

ओडिशा राज्य के दक्षिणी मध्य भाग में बसा कंधमालअपनी सुगंध से भरपूर हल्दी के लिए प्रसिद्ध है। इस स्थान पर हल्दी आदिवासियों द्वारा सदियों से उगाई जा रही है।   यहां का लगभग साठ से सत्तर प्रतिशत क्षेत्र पहाड़ी है और घने जंगलों से ढका हुआ है। जलवायु के हिसाब से, हल्दी के अलावा यह... Continue Reading →

कोविलपट्टी की कडलै मिठाई (Kovilpatti Kadalai Mittai, Tamil Nadu)

१९४० के दशक में पोनाम्बला नादर नामक, एक समृद्ध किराने की दुकान के मालिक ने, परंपरागत तरीके से बनाई जाने वाली खजूर के गुड़ और मूंगफली की कडलै मिठाई को एक नया रूप देने के लिए गन्ने के गुड़ और मूंगफली से बनाने का निश्चय किया। स्थानीय लोगों का कहना है कि दशकों से कोविलपट्टी... Continue Reading →

गुजरात का भलिया गेहूं (Bhalia Wheat, Gujarat)

गुजरात के स्थानीय निवासियों का मानना है कि भाल नामक क्षेत्र में बड़े पैमाने पर उगाए जाने वाले गेहूं का नाम संस्कृत के शब्द भाल के ऊपर पड़ा है, जिसका अर्थ है 'मस्तक', ऐसा इसलिए है क्योकि यह क्षेत्र भी मस्तक के समान सपाट दिखता है। यह सुनने में अजीब लगता है, परन्तु वास्तव में... Continue Reading →

तेलंगाना की निर्मल शिल्प कला (Nirmal Toys and Craft, Telangana)

निर्मल शिल्प कला का नाम आंध्र प्रदेश - तेलंगाना के सुविख्यात शासक नेम्मा नायडू के नाम पर पड़ा है जो कि विविध कलाओं के महान संरक्षक थे। खिलौने बनाने की बारीकियों और शिल्प कौशल को देखकर उन्होंने इस कला को प्रोत्साहित किया। उनके राज्य में यह उद्योग खूब पनपा और इसने तेलंगाना राज्य के निर्मल... Continue Reading →

वाराणसी के खिलौने (Varanasi Wooden Lacquerware and Toys, Uttar Pradesh)

उत्तर प्रदेश का वाराणसी शहर बहुत वर्षों तक भारत के सबसे बड़े खिलौने उद्योग के केंद्र के रूप में प्रसिद्ध रहा। माना जाता है कि इस प्राचीन कारीगरी को ना केवल अपने समय के राजाओं बल्कि मुगलों और ब्रिटिश शासकों द्वारा भी संरक्षण प्राप्त हुआ था। इस कारीगरी का प्रादुर्भाव कब और कैसे हुआ इस... Continue Reading →

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