कंधमाल हल्दी (Kandhamal Haladi, Odisha)

ओडिशा राज्य के दक्षिणी मध्य भाग में बसा कंधमालअपनी सुगंध से भरपूर हल्दी के लिए प्रसिद्ध है। इस स्थान पर हल्दी आदिवासियों द्वारा सदियों से उगाई जा रही है।

   

यहां का लगभग साठ से सत्तर प्रतिशत क्षेत्र पहाड़ी है और घने जंगलों से ढका हुआ है। जलवायु के हिसाब से, हल्दी के अलावा यह क्षेत्र अन्य मसालों जैसे: अदरक, सरसों और इमली की खेती के लिए भी उपयुक्त है। आदिवासियों द्वारा अपनाई गई जैविक खेती की पद्धति पर्यावरण की दृष्टि से उच्च उत्पादकता वाली है। प्रकृति और जलवायु का पूर्ण रूप से तालमेल ही यहां की हल्दी और अन्य फसलों की बेहतर सुगंध, स्वाद, रंग और उच्च गुणवत्ता का मुख्य कारण है।

 

प्रसिद्ध कंधमाल हल्दी प्रतिकूल जलवायु की परिस्थितियों में उगती है जैसा कि हम जानते हैं कि ओडिशा में वातावरण के प्रतिकूल होने में देर नहीं लगती। यहां की शासन प्रणाली के पूर्ण सहयोग और समर्थन के कारण, स्थानीय लोग पूरे जैविक तरीके से बिना किसी पेस्टिसाइड का प्रयोग किए हल्दी का उत्पादन करते हैं।

   

स्थानीय निवासियों का कहना है कि यहां के पंद्रह फीसदी लोग पूर्णतया हल्दी की खेती में ही लगे हैं। हल्दी की खेती की शुरुआत वर्षा ऋतु में होती है तथा इसे तैयार होने में लगभग एक वर्ष का समय लग जाता है। उसको पीसने के लिए प्रोसेसिंग यूनिट में ले जाया जाता है। ऐसा अनुमान है कि करीब तेरह हजार हेक्टेयर भूमि में इसकी खेती की जाती है और १.२३ लाख मीट्रिक टन गीली हल्दी और २५००० टन सूखी हल्दी का असाधारण उत्पादन होता है।

 

शोध से पता चलता है कि इस हल्दी में  सुनहरी रंगत की प्रधानता होती है जिस कारण यह सुनहरा पीला रंग लिए होती है। इसकी मादक सुगंध ओडिशा के व्यंजनों को विशिष्ट स्वाद प्रदान करती है। इस हल्दी के पत्तों को ओडिशा के एक खास व्यंजन ‘एंडुरी पिता’ बनानें के लिए उपयोग में लाया जाता है जो इसको एक खास और तीखा स्वाद प्रदान करती है।

   

इस हल्दी का भारत ही नहीं अपितु विदेशों में भी बहुत बड़ा बाज़ार है। इसका उपयोग बड़े पैमाने पर सौंदर्य प्रसाधनों को बनाने में किया जाता है क्योंकि इसमें साधारण हल्दी कि तुलना में ओलियोरीसीन और वाष्पशील तेल अधिक होता है। इसके रोगाणुरोधी और सूजनरोधी गुणों के कारण इसका इस्तेमाल साबुन और सौंदर्य को बढ़ावा देने वाली क्रीम को बनाने में किया जाता है।

 

यह हल्दी अपने औषधीय गुणों और उपचारात्मक गुणों के लिए भी जानी जाती है। फार्मा कंपनिया हल्दी के ओलियोरेसिन का इस्तेमाल कैंसररोधी दवाइयां और मलहम बानाने के लिए करती हैं।

 

कंधमाल हल्दी को अपने अनूठे शानदार पीले रंग, विशिष्ट स्वाद – सुगन्ध, भौतिक, रासायनिक और उच्च औषधीय गुणों  तथा औद्योगिक उपयोगों के कारण सन २०१९ में प्रतिष्ठित भौगोलिक संकेत टैग (जी आई) का अधिकार प्राप्त हुआ।

 

लेखिका: लक्ष्मी सुब्रह्मणियन (https://sahasa.in/2020/09/15/kandhamal-haladi-of-odisha/)

हिंदी अनुवाद: गीता खन्ना बल्से

 

* तस्वीरें केवल प्रतीकात्मक हैं (सार्वजनिक डोमेन / इंटरनेट से ली गई हैं। अनजाने में हुए कापिराइट नियमों के उल्लंघन के लिए खेद है।)

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