महाराष्ट्र का लासलगाव प्याज़ (Lasalgaon Onion, Maharashtra)

नाशिक जिले के निफाड तालुक में स्थित लासलगाव न केवल भारत अपितु समस्त एशिया में प्याज का सबसे बड़ा बाज़ार है। कई लोगों को इस बात का पता ही नहीं होगा कि महाराष्ट्र देश में प्याज का सबसे बड़ा उत्पादक है। प्रसिध्द लासलगाव प्याज़ जिसे लाल निफाड या नाशिक प्याज के नाम से भी जाना जाता है, एशियाई बाजार में प्याज की बिक्री की दरों को प्रभावित करता है।

 

स्थानीय निवासियों का कहना है की लाल प्याज नाम की इस किस्म की खेती लासलगाव व उसके आसपास के गांवों में कई पीढ़ियों से चल रही है। पिछले छ: दशकों से इसकी खेती और भंडारण में पारंपरिक तरीकों का ही प्रयोग किया जा रहा है। प्याज की इस हल्के लाल रंग की किस्म के उत्पादन के लिए यहां की जलवायु और मिट्टी बहुत ही उपयुक्त है।

   

लासलगाव की काली मिट्टी में कैल्शियम और मैग्नेशियम के एलुमिना और कार्बोनेट्स तत्व प्रचुर मात्रा में होते हैं साथ ही फास्फोरस, पोटाश और निम्न मात्रा में नाइट्रोजन भी पाया जाता है। मिट्टी केवल मामूली रूप से क्षारीय है जो अच्छी उपज और उत्कृष्ट गुणवत्ता वाले प्याज प्रदान करती है। मिट्टी में सल्फर की मात्रा अधिक होने के कारण प्याज का तीखा स्वाद अन्य किस्मों की तुलना में अधिक होता है। किसानों द्वारा यह देखा गया है कि यदि इसी किस्म को कहीं और उगाया जाए तो उसमें वही गुणवत्ता नहीं पाई जाती है।

 

नाशिक जिले में वर्ष भर में २६०० मिलीमीटर से ३००० मिलीलीटर तक वर्षा होती है और आर्द्रता लगभग ४३ से ६२ प्रतिशत तक होती है। हालांकि मानसून के समय हवा में भारीपन और वातावरण में आर्द्रता अधिक होती है लेकिन साल के बाकी महीनों में मौसम शुष्क रहता है जो की प्याज की खेती के लिए उत्तम होता है।

   

आमतौर पर प्याज का उत्पादन तीन मौसमों में होता है। पहला है खरीफ (मई – जुलाई से अक्टूबर – दिसंबर तक) दूसरा, खरीफ के अंत में (अगस्त – सितंबर से जनवरी – मार्च तक) तीसरा है रबी (अक्टूबर – नवंबर से अप्रैल – जून तक) परंतु लासलगाव की अधिक पैदावार देने वाली हल्की लाल प्याज़ रबी के मौसम (अक्टूबर – नवंबर) में उगाई जाती है। इसकी बुवाई अक्टूबर – नवंबर में की जाती है और खेत की ट्रैक्टर की सहायता से अच्छी तरह गुड़ाई की जाती है। पुराने समय में प्याज़ के बल्बों को बांस के बने पारंपरिक चाल में संग्रहित करके रखा जाता था। इस विधि में हवा की कमी और उमस के कारण प्याज के बल्ब काफी मात्रा में खराब हो जाते थे और किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ता था। अब नाशिक में NAFED के द्वारा एक बड़ा वाणिज्यिक प्याज़ भंडारण बनाया गया है, यह बहुतल्ला संरचना है, और इस प्रकार बनाई गई है की नीचे से बराबर हवा का संचरण बना रहें, जिससे प्याज के बल्ब सूखे रहते हैं और अगली बुवाई तक सुरक्षित भी रहते हैं ।

   

लासलगाव प्याज़ अपने हल्के लाल रंग और स्वाद में तीक्ष्ण और आकार में अन्य प्याजो की तुलना में बड़ा तथा अधिक समय तक टिके रहने के कारण बेहद लोकप्रिय है। आकार में बड़ा होने के कारण यह काटने में आसान रहता है और बेकार नहीं जाता, यही कारण है कि यह घरेलू और वाणिज्यिक दोनो ही क्षेत्रों में पसंद किया जाता है।  अन्य प्याज की किस्मों की तुलना में इस प्याज में कई कई परतें होती हैं जिस कारण अंदर का बल्ब सुरक्षित रहता है और प्याज जल्दी खराब नहीं होता। इस किस्म के प्याज का भंडारण लगभग आठ से नौ महीने तक किया जा सकता है, जिसे भंडारण के हिसाब से बहुत अधिक माना जाता है।

  

लासलगाव प्याज़ विटामिन बी २, विटामिन सी, मिनरल्स, कैल्शियम और आयरन से भरपूर है साथ ही इसमें काफी औषधीय गुण भी हैं। लासलगाव के बाजारों से प्याज़ सम्पूर्ण भारत में वितरित किया जाता है और सिंगापुर व मलेशिया को भी निर्यात किया जाता है।

 

लासलगाव प्याज़ को २०१६ में भागोलिक सांकेतिक चिन्ह (जी आई) प्रदान किया गया। यह प्याज वर्षभर उपलब्ध रहता है और इस किस्म के प्याज के अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निर्यात की अपार संभावनाएं को देखते हुए अनेकों सरकारी उपक्रम किए जा रहे हैं ताकि इसकी गुणवत्ता और ताजगी को तकनीकी तरीकों से संरक्षित किया जा सके।

 

लेखिका: लक्ष्मी सुब्रह्मणियन (https://sahasa.in/2020/11/10/lasalgaon-onion-of-maharashtra/)

हिंदी अनुवाद: गीता खन्ना बल्से

 

* तस्वीरें केवल प्रतीकात्मक हैं (सार्वजनिक डोमेन / इंटरनेट से ली गई हैं। अनजाने में हुए कापिराइट नियमों के उल्लंघन के लिए खेद है।)

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