आसाम की तेज़पुर लीची (Tezpur Litchi of Assam)

पूर्वोत्तर राज्य आसाम के बारे में शायद बहुत से लोग इस बात से अनजान हैं कि यह राज्य जैविक विविधता, विभिन्न वनस्पतियों और जीव जंतुओं से समृद्ध राज्य है। आसाम अपनी उष्णकटिबंधीय वर्षा वनों, बांस के बगीचों, राष्ट्रीय उद्यानों साथ ही विभिन्न प्रकार की स्थानीय खेती और फलों के उत्पादन के लिए भी जाना जाता है।

   

तेज़पुर की सुप्रसिद्ध लीची आसाम के प्रमुख जैविक उत्पादों में से एक है। तेज़पुर लीची बड़े पैमाने पर “लिचु पुखरी” नामक एक प्रसिद्ध बाग में उगाई जाती है, इसकी स्थापना १९२२ से १९२४ के बीच में वहां के प्रसिद्ध साहित्यकार स्वर्गीय पद्मनाथ गोहेन बरुआ द्वारा की गई थी, जो तेज़पुर नगरपालिका बोर्ड के अध्यक्ष थे। यहां पांच बीघा जमीन में लीची के २६ पेड़ हैं। यह खास किस्म की लीची ही लिचु पुखरी है, यह पहले पलटन पुखरी के नाम से जानी जाती थी।  यह बाग तेज़पुर शहर के बीचों बीच स्थित है, तथा पूर्ण रूप से ऑर्गेनिक पद्धति के अनुसार ही इस फल को उगाया जाता है साथ ही लीची के उत्पादन के लिए उत्तम जलवायु इस फल की उच्च गुणवत्ता और विशिष्ट स्वाद को सुनिश्चित करते हैं। यह मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान के फल के बाजारों में बहुत लोकप्रिय हैं।

   

यहां पोरोवा नामक स्थान में एक और लीची का बाग प्रसिद्ध है, यह बाग सन १९५४ में ४०० बीघा जमीन पर लगाया गया था, इसको स्थापित करने का श्रेय सूर्य प्रसाद शिंग नामक व्यक्ति को जाता है। यहां ५० किसान लीची की खेती में जुड़े है। पोरोवा से लीची बड़ी संख्या में मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, राजस्थान में भेजी जाती है साथ ही इसका निर्यात अमेरिका को भी होता है।

   

तेज़पुर में उगाई जाने वाली लीची की सबसे आम किस्मों में बॉम्बेया, पिलाजी और बिलाटी शामिल हैं। प्रचुर मात्रा में लीची पनपने का कारण है, यहां की नमी से भरा मौसम, अच्छी वर्षा, जून के महीने में (जब लीची तोड़ने का समय होता है) तापमान ३० डिग्री सैल्सियस और फरवरी में (जब फलने और फूलने का समय होता है) यहां का तापमान २१ डिग्री सैल्सियस होता है। ठंड कम होने के कारण पाला पड़ने का डर भी नहीं रहता। तेज़पुर की मिट्टी, दोमट मिट्टी (जिसमें पानी तथा अन्य पोषक तत्वों को सोखने की क्षमता होती है) और कार्बनिक पदार्थों से भरपूर है जो कि लीची के उत्पादन के लिए पूर्णतया उपयुक्त है। मानसून के आरंभ होते ही पौधारोपण किया जाता है, पांच या छः वर्ष बाद इसमें फल आने शुरू हो जाते हैं।

   

तेज़पुर की लीची अपने विशिष्ट आकार, स्वाद, सुगंध, रसदार गूदे से भरी होने के कारण अपनी एक अलग पहचान रखती है। इसमें ६० प्रतिशत रस, ८ प्रतिशत चीर, १९ प्रतिशत बीज और १३ प्रतिशत छिलका होता है। इसके अंदर रसदार गूदा अधिक मात्रा में होने के कारण इसका उपयोग स्क्वाश और पैक किए जानेवाले रस को बनाने के लिए किया जाता है।

लाल रंग के इस आकर्षक और स्वादिष्ट फल को २०१५ में भौगोलिक संकेत टैग (जी आई) प्राप्त हुआ।

 

लेखिका: लक्ष्मी सुब्रह्मणियन (https://sahasa.in/2020/11/04/tezpur-litchi-of-assam/)

हिंदी अनुवाद: गीता खन्ना बल्से

 

* तस्वीरें केवल प्रतीकात्मक हैं (सार्वजनिक डोमेन / इंटरनेट से ली गई हैं। अनजाने में हुए कापिराइट नियमों के उल्लंघन के लिए खेद है।)

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